सामाजिक संघटनाएँ एकत्रित होकर भीख मांगो अभियान करेंगे और उमनपा आयुक्त को पैसे देंगे, ताकि वो शहर के गड्ढे भर सकें...
भीख मांगों अभियान...
सामाजिक संघटनाएँ एकत्रित होकर भीख मांगो अभियान करेंगे और उमनपा आयुक्त को पैसे देंगे, ताकि वो शहर के गड्ढे भर सकें...
उल्हासनगर के ख़ूनी गड्ढे, अपघात, उसमें घायल होते और मरते लोग...
उल्हासनगर शहर का क्षेत्रफल सिर्फ 13 वर्ग किमी है, शहर भर की रोड़ की लंबाई 61.94 किलोमीटर है,पिछले पाच सालों में रोड़ के गड्ढे भरने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किया गया है।
उसके बावजूद शहर के रोड़ की अवस्था बिकट है।मनपा द्वारा गड्ढे भरने के लिए कुछ ठेकेदारो को ही हमेशा काम दिया जाता है, इसके लिए जो निविदा मंगाते है उस निविदा में दी गई गए नियम के अनुसार काम होता नही है और ठेकेदार के काम की जांच मनपा के सार्वजनिक बांधकाम विभाग के द्वारा गंभीर तरीके से नही किया जा रहा है यही कारण है कि पहली ही बारिश में रोड़ में गड्ढों की भरमार हो जाती है, इस संदर्भ में मनपा प्रशासन से कई बार शिकायत करने के, आंदोलन करने के बाद भी किसी प्रकार की कोई कारवाई नही होती है, मनपा अधिकारी और ठेकेदार, बरसात काल मे डाम्बर सड़कके गड्ढों में चिपकता नहीं इसलिये मनपा ठेकेदारों द्वारा मोटी खड़ी डाली जाती है उस कारण गाड़िया फिसलती है, मोटी खड़ी और पत्थर गाडियों के टायर से उछलकर लोगों को लगते भी है,
बरसात शुरू होते ही गड्ढे बड़े हो जाते है, लोग गिरते है, घायल होते है, जिस ठेकेदार को सड़के बनाने का ठेका दिया गया था उसने काम ठीक से न किया हो तो दोबारा उसीको दिए पैसों में से काम करवा के लेना चाहिये ऐसा सरकारी आदेश है, अगर वो नहीं करे तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए परंतु उमनपा में ऐसा होता नहीं,
पिछले सालों में सीमेंट की सड़कें बढ़ी है, डाम्बर की सड़कें कम हुई है, बावजूद गड्ढे भरने के टेंडर की रकम में कोई कमी नहीं आयी,
अगर 8 दिन में गड्ढे नहीं भरे गये तो शहर की सामाजिक संघटनाएँ एकत्र होंगी, वाहन चालक, रिक्शा वाले भाई, और अन्य संघटन एकत्रित होकर भीख मांगो अभियान करेंगे और उमनपा आयुक्त को पैसे देंगे, ताकि वो शहर के गड्ढे भर सकें।
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